Saturday, 10 August 2019

माँ- ईश्वर का दूसरा नाम

माँ- एक प्यारा सा अहसास


प्यारे से अहसास,अद्भूत प्यार,निस्वार्थ
सबसे बडे रिश्ते का,
खूबसूरत नाम है 'माँ'।

परमात्मा का दूसरा रूप,
उपमा ना जिसकी किसी से हो सके,
ऐसा अटूट बंधन, सम्बन्ध है 'माँ'।

गुणों की खान,
संस्कारों का स्त्रोत,
खिलाती है सबके चेहरों पर जो मुस्कान,
ममता का अथाह समंदर है 'माँ'।

कोख से ही सुरक्षा का कराती भान,
हर विषम परिस्थिति में,
डटे रहने का देती ज्ञान,
शिक्षा का भंडार है 'माँ'।

जिंदगी के सफर में,
गर्दिशों की धूप में,
हरपल स्नेह बरसाता आसमाँ है 'माँ'।

माँ त्याग है, तपस्या है,
मरूस्थल में बहता मीठा सा झरना है,
माँ बिन लगे जीवन अधूरा,
तन में जान है 'माँ'।

ईश्वर का दूसरा नाम है 'माँ'।

                                            "मीठी"

Friday, 9 August 2019

वो मेरी पहली सी मौहब्बत

वो मेरी पहली सी मौहब्बत



पहली बार देखा था उसे अरनियॉ थाने में,
ब्लू जीन्स और महरून ग्रे स्वेटर में।

कुछ परेशान, थोड़ा हैरान सा लग रहा था वो,
थाने के हाल को देखकर कहाँ रहूँ, कैसे रहूँ, सोच रहा था वो।

मेरा दिल शर्माया और फिर मुस्कराया था,
क्योंकि जब मैं यहाँ पहली बार आयी थी, यही सब मुझमें समाया था।

क्यूट से चेहरे वाले उस प्यारे से इंसान ने चश्मा लगाया था,
आँखों के जरिये वो मेरे दिल में समाया था।

रातों को जगने की आदत सी हो गयी थी,
उसे हर रोज मैं नोटिस करने लगी थी।

उसके साथ होने पर मुझे राहत सी मिलती थी,
पता ही नहीं चला ये मुलाकात कब आदत, कब चाहत बन गयी थी।

उस जुनून, उस सुकून का अहसास पहले कभी नहीं था,
क्योंकि वो था मेरे पास ऐसे जैसे और कोई नहीं था।

गेहुँआ सा रंग वो उसका न जाने कैसा जादू करता था,
खुद के बस में ना ही मैं, ना ही मेरा दिल रहा करता था।

उसको छुपाया है मैने अपने दिल के कोने में,
पहली बार देखा था उसे अरनियॉ थाने में।

                                                                  "मीठी"