A blog for Poems, Kavita, Shayari. नयी-नयी कवितायें शायरी व कहानिया- A blog by Meethi's Pen
Tuesday, 2 February 2021
Meri Rooh
Meri rooh se lipte rahte hai, Teri yaado ke ahsaas ...
Ab kaise batau duniya ko , ki Tu door hai ya pass ...
Wednesday, 27 January 2021
Yadein : Memories
Bheegte hai Jis trah se , Teri dilkash yaado Mai , doobkar ...
In sard fizaao Mai , kaah wo kashish, there khayalo jaisi ...
Friday, 25 October 2019
तुम्हारा जन्मदिवस गुलाबो पर रंगत लाया है
😊
तुम्हारा जन्मदिवस गुलाबो पर रंगत लाया है
तुम्हारा जन्मदिन दीवाली भी साथ लाया है
हर तरफ प्रकाश ही प्रकाश फैलाया है।
तुम्हारा जन्मदिन नया हर्ष और उमंग लेकर आया है।
उसने मुझे हमारी संगत को याद दिलाया है
वह बीता बरस याद आया है जब तुम थी नाराज
तुम्हारे जन्मदिन पर मै नहीं था तुम्हारे साथ
तुमने कॉल कर कर के मुझे अपने पास बुलाया था
फिर केक काट कर अपना जन्मदिन मनाया था
अपने हाथो से मुझे केक और टऑफीज़ खिलाया था।
Maggie
Friday, 18 October 2019
आपका जन्मदिन बसंत लेकर आया है।
आपका जन्मदिन बसंत लेकर आया है
कोयल ने मीठा गीत सुनाया है
पक्षियों ने चहचहाया है
कुसुम-सुमन ने हसकर बोला
मुबारक हो, मुबारक हो
आपका जन्मदिन बसंत लेकर आया है ।
चंदा की शीतलता ने बतलाया है
झरनों ने शोर मचाया है
मयूरों ने भी गुनगुनाया है
मुबारक हो, मुबारक हो
आपका जन्मदिन बसंत लेकर आया है ।
हवाओं ने कानों में गुदगुदाया है
विहंगों ने राग सुनाया है
यह मौसम सबको भाया है
मुबारक हो, मुबारक हो
आपका जन्मदिन बसंत लेकर आया है ।
कलियों ने मुस्कराया है
मेघों ने गडगडाया है
गेहूँ की कोपलों ने फुसफुसाया है
मुबारक हो, मुबारक हो
आपका जन्मदिन बसंत लेकर आया है ।
"मीठी"
Janu Kyun ! Janu Kyu
Kyu Chalti hai Pawan,
Because of Low Density.
Kyu Jhoome hai Gagan,
Because of Earth's Revolution.
Kyu Machalta hai Man,
Because of Mental Disorder.
Na Tum Jano Na Hum,
I Know Everything because I have answered all the questions.
Kyu Aati he Bahar,
Because of the Receding of winter.
Kyu Laut ta hai Karar,
Because of Robbers and Dacoits.
Kyu aata he Pyar,
Because of Fatal Infatuation.
Because of Low Density.
Kyu Jhoome hai Gagan,
Because of Earth's Revolution.
Kyu Machalta hai Man,
Because of Mental Disorder.
Na Tum Jano Na Hum,
I Know Everything because I have answered all the questions.
Kyu Aati he Bahar,
Because of the Receding of winter.
Kyu Laut ta hai Karar,
Because of Robbers and Dacoits.
Kyu aata he Pyar,
Because of Fatal Infatuation.
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थोडा सा शुरूर, हल्का सा गुरूर
थोडा सा शुरूर, हल्का सा गुरूर
वो जो एक सूरत है, बडी ही खूबसूरत है ।
सिद्दत से तलाशी हुई, खुदा की एक मूरत है ।
थोडा सा शुरूर और हल्का सा गुरूर है ।
कैसे सम्भालू खुद को उसे चाहने से,ये दिल उसकी मोहब्बत में चकनाचूर है ।
उसकी आँखों से मैं शब्द चुराकर अक्सर कविता लिखती हूँ।
हर कविता में उसको पढती हूँ, हर कविता में उसकी मूरत है ।
वो जो एक सूरत है, बडी ही खूबसूरत है ।
संजोया है उसको मैने अपनी डायरी के हर पन्ने में,
वो बेखवर रहता है, हर वक्त मेरे दिल के आशियाने में ।
वो जो उसका मासूम सा चेहरा है, मेरे दिल की एक जरूरत है,
वो जो एक सूरत है, बडी ही खूबसूरत है ।
Thursday, 17 October 2019
जिंदगी, साइकिल की जैसी है सवारी
जिंदगी, साइकिल की जैसी है सवारी
बात है बहुत पुरानी, उम्र भी नहीं थी जब सयानी,
सुनाती थी मेरी नानी, परियों की कहानी ।
उन दिनों उम्र महज दस साल की थी,
पंचम कक्षा में पढती थी, स्कूल की टॉपर थी ।
मामा ने खुश होकर मेरे नम्बरों से एक साइकिल दिलायी थी,
देख साइकिल जैसे उपहार को मेरे मन में भी खुशहाली आयी थी ।
सफेद, गुलाब सा रंग उसका मेरे मन को भाया था,
चलाऊँगी कैसे साइकिल, यह सोच मेरा मन घवराया था ।
रोज सुबह उठकर साइकिल चलाना , एक शौक सा था,
मेरे मन के अन्दर नयी उमंग, एक अजीब शोर सा था ।
साइकिल से रिश्ता कुछ मेरा पुराना सा हो गया था,
साइकिल जब-जब चलाती , तब तब मेरा मन खोया था ।
आज फिर उस जैसी साइकिल को देखकर, मुझे अपनी साइकिल की याद आयी,
जी चाहता है चली जाऊ दोबारा उस बचपन की गलियों में जो लौटकर कभी ना आयी ।
पर आज, जिंदगी साइकिल की जैसे है सवारी,
हर वक्त है सम्भलने की ठेकेदारी ।
"झल्ली"
तुम मेरी पहली और आखिरी सी मौहब्बत हो
तुम मेरी पहली और आखिरी सी मौहब्बत हो
ख्वाहिश नहीं तुम मेरी खुशी हो,
रूह को जो सुकून दे, सर्दी की वो धूप हो ,
ख्वाबों में जो रोज मिले, तुम वो दौलत हो,
तुम मेरी पहली और आखिरी सी मौहब्बत हो ।
तुम हकीकत नहीं, हसरत हो,
होठो पर जो तबस्सुम लाये, उन हसीन लम्हों की याद हो,
क्यों देखते हो खुद को आइने में, तुम खुद से भी ज्यादा खूबसूरत हो,
तुम मेरी पहली और आखिरी सी मौहब्बत हो ।
तुम्हें हासिल करूँ ये आरजू नहीं, तुम तो बस मेरी चाहत हो,
जेठ की धूप में ठंडक देने वाले दरख्तों का साया हो,
दिल को गवारा ही नहीं, तुम मुझसे कभी रूख्सत हो,
तुम मेरी पहली और आखिरी सी मौहब्बत हो ।
डुबाये रखता है जो हर पल मुझे तुम वो ख्याल हो,
रूह से निकले और पन्नों पर टिके तुम वो शायरी हो,
मैं तुम्हारे ही दम से जिन्दा हूँ, मर ही जाऊँ जो तुमसे फुरसत हो,
तुम मेरी पहली और आखिरी सी मौहब्बत हो ।
"मीठी"
एक प्यार ऐसा भी
उसने मुझे जब पहली बार देखा
उसे एक अलग अहसास हुआ
वो इस कदर डूबी उस अपने ही बनाए संसार में
उसने अपना दिल अपना मन मुझ पर बार दिया।
में भी तो अंजना था इस बयार से
जो उसने दिया मुझे अपने प्यार से
में भी डूब गया उस एहसास में
बिना कुछ सोचे बिना कुछ विचारे
पर एक समय आया उसने किसी और का हाथ थाम लिया
उसने मेरे और अपने दिल से बने उस रिश्ते को भुला दिया
मुझे जिंदगी भर के लिए आंसू दे गया।
उसे एक अलग अहसास हुआ
वो इस कदर डूबी उस अपने ही बनाए संसार में
उसने अपना दिल अपना मन मुझ पर बार दिया।
में भी तो अंजना था इस बयार से
जो उसने दिया मुझे अपने प्यार से
में भी डूब गया उस एहसास में
बिना कुछ सोचे बिना कुछ विचारे
पर एक समय आया उसने किसी और का हाथ थाम लिया
उसने मेरे और अपने दिल से बने उस रिश्ते को भुला दिया
मुझे जिंदगी भर के लिए आंसू दे गया।
Monday, 30 September 2019
एक शख्स- जो अश्क दे गया
एक शख्स- "जो अश्क दे गया"
मैं नीद तो मेरा ख्वाब है, एक शख्स
मैं अश्क तो मेरी आँख है, एक शख्स
मैं दुआ तो मेरी इबादत है, एक शख्स
मैं जज्बात तो मेरी मौहब्बत है, एक शख्स
मैं दिल तो मेरी धडकन है, एक शख्स
मैं होठ तो मेरी मुस्कान है, एक शख्स
मैं किताब तो मेरे अल्फाज है, एक शख्स
मैं गीत तो मेरा साज है, एक शख्स
मैं सूरत तो मेरी सादगी है, एक शख्स
मैं फूल तो मेरी ताजगी है, एक शख्स
मैं नदी तो मेरा नीर है, एक शख्स
मैं किरदार तो मेरी पूरी कहानी है, एक शख्स
मैं सागर तो मेरी गहराई है, एक शख्स
मैं शरीर तो मेरी परछाई है, एक शख्स
मैं जम़ी तो मेरा आसम़ा है, एक शख्स
मैं एक किस्सा और मेरी पूरी दास्तान है, एक शख्स
मैं मीरा तो मेरा कृष्ण है, एक शख्स
एक शख्स, एक शख्स, एक शख्स
मुझमे, मुझमे बस मुझमे समाया है, एक शख्स ।
"मीठी"
Saturday, 21 September 2019
काश तुम मेरे होते
काश तुम मेरे होते
क्या तुमसे अच्छा क्या कोई मुझे समझ पायेगा,
मेरी बेरंग दुनिया में क्या कोई रंग लायेगा,
मेरे बन्द होठों को क्या कोई अल्फाज दे पायेगा,
मेरी अधूरी मुस्कान को क्या कोई पूरी कर पायेगा।
सूखे समंदर की प्यास क्या किसी और को समझ आयेगी,
मेरी अधूरी कहानी कहाँ तुम बिन पूरी हो पायेगी,
हे प्रियवर, झल्ली खुद से पूछती है ये सवाल,
क्या तुम बनोगे जबाव ।
जबाव मैने ढूंढ लिया था,
पर तुम कर ना सकी उस पर इकबाल,
प्रश्न आज भी प्रश्न रह गया,
तुमने किसी और का हाथ साथ अपना लिया ।
आज तुम बिन मेरी दुनिया बेरंग है,
मेरी अधूरी मुस्कान है, होठ बन्द हैं,
तुम बिन मेरी कहानी अधूरी है झल्ली,
जबाव मैं दे चुका था, तुम हमराही क्यों न बन सकीं,
आज भी यही एक सवाल है।
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Wednesday, 18 September 2019
कुछ प्रश्न
उसका और मेरा नाता कुछ तो है,
यूँ ही तो तूने हमें ना मिलाया होगा।
कुछ फलसफा तो होगा इस मुलाकात का भी,
यूँ ही तो तूने हमें न तो रूलाया होगा।
यूँ ही तो तूने हमें ना मिलाया होगा
मिला दे
उसे और मुझे तू मिला दे,
यूँ ना तू हमें जीने की सजा दे।
गर करें हैं हमने कुछ पुण्य,
तो भुला दे सब, और कर दे शून्य।
सारी गिला मिटा अब,
अब हमें मिला दे।
Tuesday, 3 September 2019
गुजरा हुआ वक़्त
उसने मेरा हाथ ऐसे छोड़ दिया
उसने सारे किए वादों को ऐसे तोड़ दिया
उसने मेरे साथ बिताए लम्हों को यूं भुला दिया
जैसे मैं वो बुरा समय था जो उसने गुजार दिया।
आज वो मुझे बंदिशों में रहना सिखा रही है
मुझसे दूर जाती जा रही है
गर मैं शिकायत करू तो प्यार जताती है
वो ये सब करके सायद अपने अनसुलझे रिश्ते को बचा रही है
पर मुझे भी उससे कोई गिला नहीं सिकवा नहीं
मै अब उसके लिए सायद जी का जंजाल हूं
पर मेरा दिल ये नहीं समझता
उसके लिए आज भी है तड़पता
Maggie
Monday, 26 August 2019
मजबूर हो रही है
मजबूरी
वो आज मुझसे दूर हो रही है,
ना चाहते हुए भी मजबूर हो रही है।
वो उन अनचाहे रिश्तों को निभा रही है,
उन्हें निभाते-निभाते अपना वजूद खोती जा रही है।
अपने आंसू और दर्द को अब मुझे नहीं बता रही है वो,
शायद वो मुझे अपना नहीं समझती, मुझे पराया करती जा रही है वो।
कहती है मुझे अब तुझसे दूर जाना है,
पर शायद उसे नहीं पता, मेरे और करीब आती जा रही है् वो।
माना अब हम एक साथ नहीं,
पर आज भी हम दोनों को उस दूरी का अहसास नहीं।
आज भी करती है वो मेरी फिकर पर जताना चाहती नहीं,
दोबार से सब बयान करके मुझे सताना चाहती नहीं।
मैं उसे अपने से ज्यादा जानता हूँ,
पर उस नादां को कौन समझाये, मैं उसके दर्द को उससे पहले पहचानता हूँ।
"मैगी"
Friday, 16 August 2019
हाँ मैं मिस करता हूं
कैसे पीछे छोड दूँ
हाँ मैं मिस करता हूं , उसके हाथ का खाना
उसके साथ घूमने जाना, उसके साथ बिताए लम्हे ।
हाँ मैं जानता हूं, वो आज नहीं करती अपनी मोहब्बत का इजहार
क्युकी अब उसने बसा लिया है किसी और के साथ अपना घर - संसार।
हाँ मैं जानता हूं, वो आज भी मुझसे बेइंतहा मोहब्बत करती है,
बस इस समाज और परिवार के कारण मुझे अपनाने में डरती है।
हाँ मैं जानता हूं मै ही हूं उसका पहला प्यार, जिसे वो अपना ना सकी
उसकी भी कुछ मजबूरियां रही होंगी, तभी तो मेरे साथ को अपना बना ना सकी।
हाँ मै जानता हूं कि वो नहीं आएगी अब मेरे पास ,
पर में उसका इन्तज़ार करना केसे छोड़ दू
उन प्यारे लम्हों को में कैसे पीछे छोड़ दू।
"मैगी"
"मैगी"
तू मेरा कौन है
तू मेरा कौन है
तू हवा का ठण्डा झौका है,
कभी नाजुक तो कभी तूफां है,
हाँ मेरा गुजरा लम्हा है,
मगर तेरे बिन मेरा जीवन तन्हा है।
कुछ टूटा सा, कुछ रूठा सा है,
हर पल मेरे अधरों पर सजा सा है,
एक दोस्त तू मेरा सच्चा सा है,
मैं अगर रागिनी तू बीन सा है।
मेरे प्यासे नयनों में तू बहता झरना सा है,
गूँजता उर में मेरे तू एक नगमा सा है,
मैं चमकती बिजूरी सी, तू मेरा आसमां है,
जिसको टूटने की तलव नहीं तू वो एक सपना है।
तू मुझे पूछता है तू मेरा कौन है?
तू दूर है मगर पास है,
तू मेरे जीवन में सबसे खास है,
जज्बातों का बहाना नहीं बनाती,
तू मेरे दिल में धडकता खूबसूरत अहसास है।
"मीठी"
Thursday, 15 August 2019
मेरे अजीज दोस्त
मेरे अजीज दोस्त
हसते थे, हसाते थे,
समझते थे, समझाते थे,
थोडी मेरी सुनते, थोडी अपनी बताते थे,
कुछ ऐसे अजीज दोस्त मेरे थे।
जब किसी रोज पलके बिछायें मैं बैठ जाया करती थी,
उदास दिल में गम छुपाये रखती थी,
वो हसी और ठिठोली से मुझे गुदगुदाया करते थे,
कुछ ऐसे अजीज दोस्त मेरे थे।
था मुझे शौक अपने विचारों को उनके समक्ष रखने का,
हर गलत बात टोकने का, उन्हे निखारने का,
वो सब मुझे मिलकर दार्शनिक बुलाते थे,
कुछ ऐसे अजीज दोस्त मेरे थे।
पाते थे जब कभी मुझको अकेला सा,
कभी सवेरा तो कभी सहारा बन जाया करते थे,
मेरे अंधेरों में वो उजालों सी किरण बन जाया करते थे,
कुछ ऐसे अजीज दोस्त मेरे थे।
वो दोस्त मेरे बहुत खूब थे,
मौज-मस्ती से भरपूर थे,
वो रौनक का बाजार लिये थे,
कुछ ऐसे अजीज दोस्त मेरे थे।
"मीठी"
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Tuesday, 13 August 2019
बारिश- वर्षा
बारिश- वर्षा
बारिश जब-जब आती है, सबके चेहरे पर खुशियाँ छाती है,
कल-कल करती हुई नदियाँ बहती हैं, इठलाती है,
मानो मधुर-मधुर सा संगीत सबको सुनाती है,
बादलों की घुमड-घुमड, ठण्डी-ठण्डी पवन,
तन-मन को लुभाती है,
बारिश जब-जब आती है, सबके चेहरे पर खुशियाँ छाती है।
पेड, पौधे, लताए और फूलों पर,
बारिश की बूंदे मोती सी बनकर सज जाती है,
बागों मे खिलते फलों की सुगंध सबको भाती है,
रिमझिम बरखा रानी फूलों को खिलाती है,
बारिश जब-जब आती है, सबके चेहरे पर खुशियाँ छाती है।
बारिश की बूदें प्यासी धरती की प्यास बुझाती जाती है,
पेड-पौधे, जीव-जन्तु सबको जीवन दे जाती है,
भीषण गर्मी से बचाती है, शीतलता बरसाती है,
वर्षा बहार भू पर जीवन की ज्योति जलाती है,
बारिश जब-जब आती है, सबके चेहरे पर खुशियाँ छाती है।
टप-टप करती बारिश की बूंदे खिडकी की दीवार पर खटखटाती हैं,
बचपन में उनके साथ खेलती थी शायद इसलिये मुझे बुलाती हैं,
मन मयूर होने लगता है आंखे भीग जाती हैं,
मगर अब कैसे समझाऊ बारिश को, उम्र की बेडिया नहीं तोडी जाती हैं,
बारिश जब-जब आती है, सबके चेहरे पर खुशियाँ छाती है,
"मीठी"
Monday, 12 August 2019
मेरा दोस्त - मेरी आंखों का तारा
मेरा दोस्त - मेरी आंखों का तारा
रहन-सहन उसका अजीब है,
उसकी हर बात में तहजीब है।
वो सबसे न्यारा, सबसे प्यारा है,
एक दोस्त मेरी आंखों का तारा है।
मेरी खामोशी को वह सुन लेता है,
उदासी को पढ लेता है।
हर कमी, हर गलती मेरी अपनाता है,
मैं भटक जाती हूँ, गर अपने पथ तो मुझे समझाता है।
मुझे सम्भालता गिरने से वो मेरा सहारा है,
एक दोस्त मेरी आंखों का तारा है।
अब का नहीं जन्मों का लगता है अपना याराना है,
क्या रिश्ता है हम दोनों में मुश्किल सबको समझाना है।
मैं नीर की जैसी प्यासी हूँ, वो नदिया की धारा है,
एक दोस्त मेरी आंखों का तारा है।
दुनिया की किसी शोहरत की ना उसे दरकरार है,
लाख उतार चढाव आने पर भी उसने ये रिश्ता रखा बरकरार है।
वह आवारा सा है, पागल सा है,
मगर मेरी खुशियों का पिटार है,
एक दोस्त मेरी आंखों का तारा है।
"मीठी"
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स्नेह बंधन
Sunday, 11 August 2019
वजह जीने की
वजह जीने की
1. क्या लिखू, चेहरे पर चिंता की लकीरें लिखू,
या उदास आँखों की नमी लिखू,
या लिखू बात कुछ सीने की,
दिल चाहता है, चलती साँसों को रोक लूँ,
ए खुदा कोई तो वजह दे जीने की।
2. मुस्कराना आदत थी मेरी,
मगर ये आदत गुमनाम हो गयी,
गम ए दोस्ती यूँ सरेआम हो गयी ।
"लफ्ज ए मीठी"
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